आय प्रमाणित कराने को लेकर भटक रहे अभिभावक
राज की बातें/जयन्त पोरवाल:
निजी विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा के लिए लड़नी पड़ रही हस्ताक्षर की जंग
झालरापाटन। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के तहत सरकार 25 प्रतिशत सीटों पर निजी विद्यालयों में निशुल्क प्रवेश हेतु दिशानिर्देश व प्रवेश फॉर्म जारी हो चुके है, वहीं दूसरी ओर नगरपालिका क्षेत्र में पात्र गरीब परिवार आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटक रहे हैं और इसके अभाव में आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2 लाख 50 हजार रुपए वार्षिक आय वाले परिवार इस योजना के पात्र हैं। लेकिन जब आय प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत अधिकारी ही उपलब्ध न हो, तो यह अधिकार कागजों तक सीमित होता लग रहा है।
शिक्षा का अधिकार मिला, पर आय कौन तय करें?
नगरपालिका क्षेत्र के अभिभावक इन दिनों स्कूल, अस्पताल, तहसील और अन्य सरकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। राजपत्रित अधिकारी जान पहचान के अभाव में हस्ताक्षर करने से इनकार कर रहे हैं। जब आय प्रमाण पत्र ही जारी नहीं होगा तो आरटीई के तहत प्रवेश कैसे संभव होगा।
बीएलओ की तर्ज पर हो अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति
कानूनी दृष्टि से यह स्थिति गंभीर है। शिक्षा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21- ए के तहत मौलिक अधिकार है। यदि प्रशासनिक व्यवस्था के अभाव में पात्र बच्चों को आवेदक से रोका जाता है, तो यह उनके संवैधानिक अधिकार का अप्रत्यक्ष हनन होगा। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, न की नागरिक की मजबूरी। नगर पालिका व नगरपरिषद बोर्ड भंग होने के कारण जनप्रतिनिधि उपलब्ध नहीं है, वही राजपत्रित अधिकारी आय प्रमाणित करने से बच रहे हैं। परिणाम स्वरूप गरीब परिवार दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर है। नागरिको की मांग है कि बीएलओ की तर्ज पर अधिकृत अधिकारी नियुक्त हो तो इस समस्या से निजात मिल सके।
सामान्य व ओबीसी वर्ग के पात्र परिवारों को हर वर्ष जमा कराना पड़ता है आय प्रमाण पत्र
सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के कम आय वर्ग के पात्र परिवारों को हर वर्ष आय प्रमाण पत्र बनवाना पड़ता है। पुराना आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और जन आधार कार्ड व अन्य मूल दस्तावेज दिखाने के बावजूद अधिकारी प्रमाणन से इनकार कर रहे हैं। इससे सबसे अधिक नुकसान उन्हीं परिवारो का हो रहा है जो पहले से आर्थिक रूप से कमजोर है। नगर पालिका क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि नगरपालिका क्षेत्र में आय प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत अधिकारी की तत्काल नियुक्ति हो। आरटीई आवेदन अवधि में विशेष शिविर लगाकर आय प्रमाण पत्र जारी किए जाएं। पूर्व जारी आय प्रमाण पत्र या स्वघोषणा पत्र को अस्थाई रूप से मान्य किया जाए। आवेदन तिथि में आवश्यक विस्तार किया जाए। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि गरीब, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।
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